Wednesday 31 May 2017

पूर्वजों के धरोहर या सम्मान का आदर

गाय को माता क्यों कहे?
भैस, भेड़, बकरी को माता क्यों नहीं कहते? भैस, ऊंट, भेड़ का दूध तो गाय के दूध से मोटा होता है।

कारण है गाय ने मानवता की रक्षा की है। उसके बहुत उपकार हैं हम पर। और हम उस उपकार के बदले सिर्फ माँ ही कह सकते हैं। 
वैसे ये बातें मजाक से कम नहीं लगती है। लेकिन मनु काल में प्रलय के बाद जब चारों तरफ महामारी फैली हुई थी। खाने को कुछ नहीं था। तब गाय का दूध ही हमारी महामारियों और भूख से रक्षा की थी। जबकि अन्य पशुओं का दूध रोगी बनाने वाला था।

शास्त्रों में कहा गया है कि चांडाल, बांझ, रुग्ण, टूटी सींग वाली गाय पूजन योग्य नहीं है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि उनकी हत्या कर दें। चूँकि आधुनिक समय में भले ही उनकी पूजा ना कर पाए लेकिन गाय का आदर तो कर सकते हैं। शहर में दिखने वाले आवारा गाये, आवारा नहीं होती उनके स्वामी होते हैं लेकिन जब वे दूध नहीं देती तो उनका हर दिन का भोजन मंहगा पड़ता है और लोग सड़कों पर छोड़ देते हैं। जब ये गर्ववती होकर दूध देने योग्य होती है तो फिर बांध लेते हैं। अब ऐसी है गऊ भक्ति। 
देश में हिन्दू हो या मुस्लिम सभी को गाय का सम्मान करना चाहिए। क्योंकि देश के 99 प्रतिशत मुसलमान भी देशवासी हैं उनके पूर्वज हिन्दू थे। उन्होंने भगवान की उपासना पद्धति बदली है। इसका मतलब यह नहीं वे अपने पूर्वजों के धरोहर या सम्मान का आदर ना कर पाए।



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